पश्चिमी क्षत्रप नहपान, रुद्रदामन प्रथम और उनकी उपलब्धियाँ


पश्चिमी क्षत्रप नहपान, रुद्रदामन प्रथम और उनकी उपलब्धियाँ

 क्षत्रप शब्द का अर्थ • क्षत्रप शब्द फारसी शब्द क्षत्रपावन का संस्कृत रूपान्तर है। जिसका अर्थ होता है प्रान्त का शासक । प्रारम्भ में क्षत्रप एक ईरानी शब्द था परन्तु शक शासकों द्वारा इस शब्द का प्रयोग भारत में भी किया जाने लगा।
भारत के विभिन्न भागों में कई क्षत्रपीय वंश थे। इनको दो भागों में विभक्त किया। जा सकता है।
(1) तक्षशिला और मथुरा के उत्तरी क्षत्रप (Northern Kshatrapas) 
(2) महाराष्ट्र तथा उज्जैन के पश्चिमी क्षत्रप (Western Kshatrapas) 

2. नहपान की उपलब्धियाँ 

(G) महाराष्ट्र के क्षहरात वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक ।। 
(ii) महाराष्ट्र के एक बड़े भाग मालवा, काठियावाड़, गुजरात और अजमेर पर नहपान | का अधिकार होना। 
(iii) कुछ इतिहासकारों के अनुसार नहपान के राज्य में काठियावाड़, दक्षिणी गुजरात,
पश्चिमी मालवा, उत्तरी कोंकण, नासिक और पूना शामिल थे। 
(iv) क्षत्रप, महाक्षत्रप की उपाधियाँ धारण करना। 
(v) 119 ईसे 124 ईतक शासन करना प्रमाणित है।
3, नहपान की राजधानी को लेकर विभिन्न विद्वानों में मतभेद रहा है और अपने अलग अलग मत दिये हैं ।
(i) भगवान लाल इन्द्रजी के मतानुसार नहपान की राजधानी जूनागढ़ थी । 
(ii) डॉ. भण्डारकर के मतानुसार उसकी राजधानी मन्टोसर या आधुनिक दसोर थी । 
(iii) प्रसिद्ध इतिहासकार फ्लीट ने नहपान की राजधानी जुन्नार या दोहद माना है। 
(iv) डॉ जायसवाल के मतानुसार उसकी राजधानी भौंच थी ।।
4. उज्जैन के पश्चिमी क्षत्रपः - 
(i) चष्टन 
(ii)रुद्रदामन

5. रुद्रदामन की उपलब्धियाँ युद्ध के क्षेत्र में

(i) पूर्वी मालवा, पश्चिमी मालवा, उत्तरी काठियावाड़, सुराष्ट्र, मरु कच्छ, सिन्धु, सौवीर,
उत्तरी कॉकण, कुकर पर स्वामित्व ।। 
(ii) सात वाहनों को पराजित करना।। 
(iii) यौधयों को पराजित करना।
(iv) उज्जैन के शक- क्षत्रपों में सबसे प्रसिद्ध एवं पराक्रमी सम्राट । 6.रुद्रदामन का मूल्यांकन (1) एक विजेता के रूप में (2) एक कुशल तथा सफल प्रशासक (3) संस्कृत भाषा और साहित्य का आश्रयदाता (4) उत्कृष्ट चरित्र का धनी 7.रुद्रदामन के उत्तराधिकारी :दामोदर श्री. दीवामन, रुद्रसिंह।
8.मूल्यांकन - 3. सातवाहनों का पुनरुत्थान, गौतमी पुत्र शातकण के समय सातवाहनों की शक्ति (Revival of the Satavahan : Power under Gautmiputra Shatkarni)

1. सातवाहन कौन थे ? 

सातवाहन वंश के विषय में जानकारी देने वाले स्रोत पुराण, ऐतरेय ब्राह्मण तथा सातवाहन वंश के शासकों के कई अभिलेख है। इनके विषय में जानकारी के लिए कुछ मत निम्न हैं।
(i) पुराणों में सातवाहनों को आन्ध्र या आन्ध्र भृत्य कहा है। (ii) सुकथणकर के अनुसार - सातवाहन शब्द का अर्थ है आन्ध्र का नृत्य (ii) डा.गोपालाचारी आन्ध्र को ही भृत्य मानते हैं। उनके अनुसार अशोक के अभिलेख
के यवनों के साथ ही आन्ध्रों का भी उल्लेख हुआ है। असम्भव नहीं कि आन्ध्र
सातवाहन मौर्यों के भृत्य रहे हों ।। (iv) डॉ.रैप्सन और स्मिथ ने सातवाहन और आन्ध्र को भिन्न भिन्न जातियाँ माना है। (v) डा. भण्डारकर उन्हें क्षत्रिय मानते हैं। (vi) ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार सातवाहन ब्राह्मण थे ।।

2. सातवाहनों का मूल निवास स्थान - 

(i) डॉ. रैप्सन और स्मिथ के मतानुसार - सातवाहन आन्ध्र के निवासी अवश्य थे किन्तु
आन्ध्रों से उनका कोई सम्बन्ध नहीं था। उनका कथन है कि “सातवाहनों का मूल देश महाराष्ट्र था ।” उन्होंने आन्ध्र में जाकर वहाँ के मूल निवासियों को पराजित कर उपनिवेश बनाया। उसके पश्चात् शक अमीरों ने सातवाहनों के मूल देश पर कब्जा कर लिया और उनके पास केवल आन्ध्र वाला भाग रह गया । इसलिए ये
सातवाहन आन्ध्र कहलाये।। (ii) डॉ. गोपालाचारी सातवाहनों को आन्ध्र का मूल निवासी मानते हैं। (iii) डॉ. चौधरी के अनुसार मध्य देश का दक्षिणी भाग सातवाहनों का मूल निवास
स्थान था। 3. सातवाहनों के शासक - (i) सिमुक
(ii) कृष्ण (कान्ह) (iii) शातकणि प्रथम (iv) हातकर्णि द्वितीय
(v) अपीलक
(vi) हान
(4) त्रिय नरश को पराजित करना। (31) , इलद्र व वने का दिन (iii) हात वंश नपान पर विजय
की राज्य के समये बगल में खड़े रब सागर तथा (5) त पुत्र शादी
हिमहान विस्तृत हुन।। 

7. शानद की शासन व्यवस्था -

 ४. वैदिक धर्य और वाश्रय व्यवस्था का पुनसंस्थापक 9. इतिग्री पुत्र शातक का मूल्यांकन
(2) आदर शासक (1) वीर योद्धा और महान विजेता
(4) धार्मिक सहि व्यक्ति (3) प्रजावाल और ज्ञानी
| (6) विद्वानों को आश्रयदाता (5) ब्राह्य धर्म का पोषक (7) उच्च कोटि का विद्वान् । 10. मानवाहन शक संघर्ष के कारण (i) शक सम्राट भूमक, नहपान आदि अपने साम्राज्य को सुदृढ एवं विस्तृत करना चाहते
थे और उनकी यह इच्छा तभी पूर्ण हो सकती थी जबकि वह तत्कालीन सातवाहन राज्य के विस्तार को कम कर उसके प्रभाव को कम कर समाप्त करते । इसी कारण दोनों ही पक्षों में दीर्घकाल तक संघर्ष चला।
(ii) दूसरी तरफ सातवाहन सम्राट गौतमी पुत्र शातकर्णी भी एक वीर योग्य एवं
महत्त्वाकाँक्षी शासक था। वह भी साम्राज्य विस्तार की नीति का अनुसरण कर रहा था। अतः उसकी यह नीति संघर्ष का कारण बनी।।

11. संघर्ष की विभिन्न अवस्थाएं - 

12. शक सातवाहन संघर्ष के परिणाम - (i) दीर्घकालीन युद्ध होने से सातवाहनों के प्रभाव व यश में कमी एवं सातवाहन शासन
का अन्त । (ii) सातवाहनों के आधिपत्य वाले महाराष्ट्र को अनेक मामन्तों एवं अमीरों ने उनसे
छीन लिया। (iii) उत्तरी कनारा जिला और मैसूर के भाग में कुन्तल और चुटु और उसके पश्चात | कन्दवों ने अपनी स्थिति को सुदृढ़ किया। (iv) इक्ष्वाकुओं ने आन्ध्रप्रदेश में अपना शासन कायम किया। (v) वाकाटकों ने विदर्भ में अपना शासन स्थापित कर लिया। (vi) विपुल धन एवं जन की अपार क्षति, कृषि एवं व्यापार को भारी क्षति ।। (vii) इस दीर्घ कालीन संघर्ष का अन्तिम परिणाम शक जाति की पजय के रूप में
आया। शकों की पराजय के कारण निस्संदेह विदेशी जातियों का भारत में बिना हिचकिचाहट बढ़े जाने की प्रवृत्ति पर रोक लगी। 13. सातवाहन युग की राजनीतिक अवस्था (i) एकतंत्रीय शासन व्यवस्था । (i) राजा का प्रमुख ध्येय प्रजा की भलाई करना। (iii) राजाओं की तानाशाही प्रवृत्ति का न होना। (iv) राजा को सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद् का गठन। (v) सामन्तों के अधीनस्थ प्रदेशों को छोड़कर शेष सारा साम्राज्य जनपद और अहारों
में विभक्त होना। (vi) स्थानीय शासन को सुचारुरूप से चलाने के लिए राजनैतिक संस्थाओं की
व्यवस्था। (vii) दण्ड विधान का प्राय: कठोर होना।।
14. सामाजिक अवस्था (i) वर्णाश्रम व्यवस्था (i) परिवार । (iii) आश्रम व्यवस्था, ब्रह्मचर्य, ग्रहस्थ, वानप्रस्थ एवं संन्यास (iv) समाज में स्त्रियों की दशा अत्यन्त सन्तोषजनक होना (v) अन्तर्जातीय विवाहों का प्रचलन (vi) वस्त्र और आभूषण (vii) समाज में संकीर्णता का अभाव

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