Western Kshatrapas- Nahapana, Rudradaman I and their Achievement.


Western Kshatrapas- Nahapana, Rudradaman I and their Achievement. 

(i) वाकाटक युग में धर्म ।
| (ii) सामाजिक दशा (iii) साहित्यिक दशा
(iv) सांस्कृतिक दशा 5. साम्राज्यवादी गुप्तों का उदय, समुद्रगुप्त और उसकी उपलब्धियाँ (The rise of the Imperial Guptas Samudra Gupta and his
achievements)

1. गुप्तों की उत्पत्ति - 

(i) डॉकाशीप्रसाद जायसवाल के अनुसार गुप्त जाट या शूद्र थे ।। (ii) डॉ. अल्टेकर, एलन तथा आयंगर आदि गुप्तों को वैश्य मानते हैं। (iii) श्री. गौरीशंकर हीराचन्द्र ओझा गुप्तों को क्षत्रिय मानते हैं। (iv) श्री. बी. भट्टाचार्य ने कलियुगराज वृत्तान्त के आधार पर गुप्तों को आन्ध्र भृत्य
माना है। () डा. राय चौधरी के अनुसार गुप्त ब्राह्मण थे। (vi) डा. पी. एल. भार्गव व डॉ. वी. सी. पाण्डेय के अनुसार भी गुप्त क्षत्रिय थे।
2. गतों का आदि अथवा मूल निवास स्थान - (G) डॉ. काशीप्रसाद जायसवाल गुप्तों को कौशाम्बी का मूल निवासी मानते थे । (ii) डॉ. डी. सी. गांगुली तथा डॉ. आर. सी जूमदार गुप्तों का मूल निवास स्थान * बंगाल सिद्ध करते हैं। (iii) डॉ. एलन, डॉ. मुखर्जी आदि के मतानुसार मगध गुप्तों का मूल निवास स्थान
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था।
(iv) कुछ इतिहास वेत्ता मानते हैं कि पूर्वी उत्तर प्रदेश गुप्तों का मूल निवास स्थान
था।
(v) डॉ. पी. एल. भार्गव मगध गुप्तों का मूल स्थान मानते हुए लिखते हैं कि “जब
उत्तरी भारत अनेक गणतंत्रों और नृपतंत्रों में बैठकर अपनी एकता खो चुका था तब पूर्व में प्रकाश की एक किरण दिखाई दी मगध प्रदेश में, जो अनेक बार साम्राज्यों की जन्मभूमि बन चुका था। एक बार फिर एक ऐसे वंश की स्थापना हुई, जिसकी छत्र छाया में उत्तरी भारत का अधिकतर भाग वैभव विद्या तथा कला से सम्पन्न हो गया। यह राजवंश गुप्त वंश के नाम से विख्यात है।”

गुप्त वंश के प्रमुख शासक 

3. श्री गुप्त - श्री गुप्त अभिलेखों एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर गुप्तों का आदि पुरुष था जिसे लक्ष्मी द्वारा रक्षित माना जाता है।
4. घटोत्कच -
महाराजा श्री गुप्त की मृत्यु के पश्चात् उसका पुत्र घटोत्कच सम्राट बना वह इस राजवंश का दूसरा नरेश था। अभिलेखों में गुप्त के पुत्र व उत्तराधिकारी के रूप में घटोत्कच का उल्लेख किया गया है। उसकी भी उपाधि महाराज थी।
5. चन्द्रगुप्त प्रथम की उपलब्धियाँ । (i) प्रयाग प्रशस्ति के अनुसार सर्वप्रथम महाराजाधिराज की उपाधि धारण की ।
से विवाह करना ।
(iii) इसने अपने वर्चस्व व पराक्रम के प्रदर्शन से एक नवीन सम्वत् प्रारम्भ किया।
यह संवत् सम्भवतः 319-20 ई. में प्रारम्भ हुआ और गुप्त सम्वत् चलाया। (iv) गुप्त वंश का प्रथम पराक्रमी सम्राट (१) डॉ.राजबली पाण्डेय के अनुसार “चन्द्रगुप्त प्रथम के अधिकार में प्रयाग, साकेत
पश्चिमोत्तर तथा दक्षिण पश्चिम बिहार थे।” (vi) अन्य विद्वानों के अनुसार बिहार, उत्तर प्रदेश तथा बंगाल के कुछ भाग भी इस
शासक के साम्राज्य में शामिल थे।

6.गुप्त साम्राज्य की जानकारी के स्रोत - 

(A) साहित्य - (1) धार्मिक साहित्य(i) पुराण
(ii) स्मृतियाँ (2) लौकिक साहित्य -
(i) विशाखदत्त की कृतियाँ (ii) कालिदास की कृतियाँ (iii) विज्जिका की रचना
| (iv) शूद्रक कृति मृच्छकटिक (v) कामन्दक नीति शास्त्र (vi) कामसूत्र (vii) परमार्थ का वसुबन्धु जीवन वृत्त । (viii) मंजूश्री
(ix) बाण का हर्षचरित (B) अभिलेख (C) मुद्रायें - (i) गरुड़ और ध्वज अंकित वाले सिक्के (i) धनुष-बाण लिये हुए सम्राट की मूर्ति (iii) परशु लिए सम्राट एवं बालक की आकृति (iv) गुप्त सम्राट व्याघ्र का आखेट करते हुए। (v) वीणा बजाते हुए सम्राट समुद्र गुप्त (vi) अश्वमेघ यज्ञ के अश्व का अंकन (D) मुहरें (E) स्मारक (F) विदेशी यात्रियों के वर्णन (i) फाह्यान
(ii) ह्वेनसांग (iii) सुंगयुन
(iv) इत्सिग (v) अल्बेरूनी समुद्रगुप्त और उसकी उपलब्धियाँ7. समुद्रगुप्त का प्रारम्भिक इतिहास सिंहासनारोहण

8. समुद्र गुप्त की उपलब्धियाँ एक विजेता के रूप में

(1) आर्यावर्त या उत्तरी भारत की विजय - सबसे पहले समुद्र गुप्त ने उत्तरी भारत के
नौ प्रमुख राज्यों की ओर विजय के लिए अभियान छेड़ा ये नौ राज्य आर्यावर्त में थे। जो हिमालय पर्वत के और विन्ध्याचल पर्वत के मध्य में विद्यमान थे। इस क्षेत्र में विजित राजाओं की सूची में ये नाम पाये जाते हैं। (i) रुद्रदेव । (i) मातिल ।
(iii) नागदत्त (iv) चन्द्रवर्मन (v) गणपति नाग
(vi) नागसेन । (vii) नन्दिन । | (iii) अच्युत
(ix) बलवर्मा। (2) आटविक राज्यों की विजय - (3) दक्षिण पथ की विजय :- दक्षिण पथ के जिन 12 राज्यों पर विजय प्राप्त की उनके
नाम प्रयाग प्रशस्ति के अनुसार निम्नलिखित हैं। (i) कौशल का महेन्द्र ।
(ii) महाकान्तार का व्याघ्रराज (iii) कौशल का ही मण्डराज (iv) कांची के विष्णुगोप (v) पिष्टपुर का महेन्द्रगिरि ।
(i) पलक्क के उग्रसेन (vii) अवभुक्त का नीलराज (viii) देवराष्ट्र का कुबेर (ix) कोट्टर का स्वामीदत्त । (x) बैंगी के हस्तवर्मन
(xi) कुस्थलपुर का धनंजय । (xii) एरन्द्रपल्ल का दमन (4) सीमावर्ती राज्यों और गणों की विजय - समुद्र गुप्त द्वारा विजय किये गये तृतीय ।
श्रेणी में सीमावर्ती राज्य आते हैं जो निम्न हैं । (i) समतट (गंगा का मुहाना) (ii) दबाक (ढाका के आसपास की भूमि)
(iii) कामरूप (असम) (iv) नेपाल और कर्तृपुः।। गणतन्त्रीय राज्यों में । (i) मालवा ।
(ii) आर्जुनायन (iv) भद्र ।
(v) आभीर (vii) सनकालीक (viii) काक
(ix) खरपरिक (5) पड़ौस के विदेशी राज्यों पर आधिपत्य एवं समुद्र गुप्त की मैत्री प्राप्त करना ।
(ii) मुरुण्ड (iii) सिंहल (श्री लंका ) (iv) सर्वदीप वासी (v) देवपुत्र शाही शाहानुशाहि 9. समुद्र का मूल्यांकन - (1) एक विजेता के रूप में समुद्र गुप्त का मूल्यांकन (2) एक कूटनीतिज्ञ के रूप में मूल्यांकन । (3) एक धार्मिक व्यक्ति के रूप में मूल्यांकन (4) एक शासक के रूप में मूल्यांकन । (5) एक कला प्रेमी के रूप में समुद्र गुप्त का मूल्यांकन (6) एक साहित्य प्रेमी के रूप में मूल्यांकन
(iii) यौधेय (vi) प्रार्जुन
(i) शक ।
10. भारत का नैपोलियन

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