History of Barby Doll in hindi


करीब 42 साल से गुड़ियाओं की दुनिया की महारानी बन कर पूरे संसार की बच्चियों के दिलों में राज करती आ रही है बार्बी। चालाक बार्बी इस दौरान कितनी ही गुड़ियाओं को रिटायर करके गुमनामी के अंधेरे में धकेल चुकी है। देश-विदेश में अब तक करीब दो अरब डॉलर का कारोबार कर चकी है बार्बी।

अब तक डेढ़ सौ से अधिक देशों में एक अरब से ज्यादा बिक चकी हैं बार्बियां। दुनिया भर में अपनी बेटी की कामयाबी पर फली नहीं समाती उसकी 82 वर्षीय जन्मदाता मां रूथ हैं डलर। 1959 में जब उसने अपने पति एलियट्ट तथा उसकी कंपनी मैटल टॉयज को प्लास्टिक की गुड़िया बनाने का सुझाव दिया तो उसने सपने में भी न सोचा होगा कि उसकी दूसरी बेटी (रूथ की पहली असल बेटी बारबरा है) बार्बी कल दुनिया के बच्चों के दिलोदिमाग पर एकछत्र राज करेगी।

कछ साल पहले जब वह इस देश में आई तो जैसे यह तय करके चली थी कि उसे हिंदुस्तान में जगह ही नहीं बनानी बल्कि लोगों के दिलोदिमाग में बरसों से जगह बनाए बैठी हुई छुईमई, शर्मिली, लाल साड़ी और बिंदी वाली भारतीय गड़िया की जगह लेनी है।

बार्बी भारत सहित विश्वभर में पिछले चालीस साल से अधिक समय से कायम और कामयाब है। बाजार में उसकी मांग लगातार बढ़ रही है। एक अकेली बार्बी सौ सवा सौ रूपये की है। लेकिन वही बार्बी अगर अपने परे लाव लश्कर को साथ लेकर आए तो उसकी कीमत कई हजार रूपये के आंकड़े को छ लेती है। बार्बी का नखरा इसलिए भी कुछ ज्यादा है कि उसकी ड्रेसिंग किसी छोटे-मोटे दर्जी ने नहीं बल्कि कि स्टिएन डायोर से लेकर गिन्नी वसेस जैसी विश्वविख्यात डिजाइनर्स ने तैयार की है।

बार्बी पर किंत-परंतु सिर्फ भारत में ही नहीं उठे, अपित उस अमेरिका में भी उठते रहें हैं जहां उसका जन्म हआ। बार्बी के खिलाफ सबसे नया फतवा आया है ईरान से । इस मुल्क से छपने वाली एक मैगजीन सोझा ने बार्बी को शैतानी गड़िया की संज्ञा दी है। अनेक विरोधी प्रतिरोधों, तर्को वितर्को के बावजूद नई दिल्ली से लेकर न्यूयार्क के बाजारों में बेहद महंगे प्राइस टैग के साथ अगर बार्बी छाई रही है तो उसका सबसे बड़ा कारण है मैटल टॉयज द्वारा उसके रूप-रंग और बनावट में आए वक्ती फैशन की लहर के अनुरूप परिवर्तन करते रहने की दूरदर्शिता। यही दूरदर्शिता बार्बी को कभी बूढ़ी या फीका नहीं पड़ने देती। और शायद यही तथ्य बार्बी के चिरस्थायी आकर्षण का सबसे बड़ा राज है।

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