मैथ्स के लिए हो जुनून


 मैथ्स एक ऐसा सब्जेक्ट है, जिसके नाम से ही कुछ लोगों के पसीने छूटने लगते हैं, तो कुछ को गणित में इतना मजा आता है कि वे दूसरे विषयों की तुलना में मैथ्स को ही ज्यादा पसंद करते हैं। हालांकि 10+2 तक के मैथ्स से कुछ अलग होता है-बीए (ऑनर्स) या बीएससी (ऑनर्स) मैथ्समेटिक्स का सिलेबस। कैसे करें खुद को इस विषय में ग्रूम, बता रहे हैं दिल्ली यूनिवर्सिटी के मैथमेटिक्स डिपार्टमेंट के प्रमुख प्रो.एस.सी.अरोड़ा।

बारहवीं तक की मैथ्स में स्टूडेंट्स थ्योरी से ज्यादा उसके एप्लीकेशन पार्ट को समझते हैं, लेकिन ग्रेजुएशन में उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वे मैथमेटिक्स की गहराई में उतरें। वे न सिर्फ मौजूदा थ्योरियों को समझें, बल्कि यह भी जानने की कोशिश करें कि यह थ्योरी क्यों और कैसे बनी? साथ ही, अब इसकी उपयोगिता क्या है? सच तो यह है कि तार्किक विश्लेषण के जरिए ही आप स्नातक स्तर की गणित में बेहतर कर सकते हैं।


सिलेबस पर रहे नजर
डीयू के स्नातक स्तर के मैथ्स के सिलेबस में मुख्य तौर पर इन क्षेत्रों को शामिल किया गया है : एनालिसिस अल्जेब्रा, डिफ्रेंशियल इक्वेशंस, मैकेनिक्स, मैथमेटिकल एनालिसिस, स्टैटिस्टिक्स, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और मैथमेटिकल प्रोग्रामिंग। डीयू के बीए (ऑनर्स) या बीएससी (ऑनर्स) मैथ्स के सिलेबस में तीन साल में आपको कुल 18 पेपर पढ़ने होंगे। फ‌र्स्ट इयर में 4 पेपर होंगे।

किताबों से करें प्यार
मैथ्स के लिए कुछ किताबें बेस होती हैं, इसलिए इन्हें जरूर पढ़ें : 
प्रिंसिपल ऑफ रिअॅल एनालिसिस : वाल्टर रुडिन 
टॉपिक्स इन अल्जेब्रा : आई.एन.हर्सटिन
पार्शियल डिफ्रेंशियल इक्वेशंस : आई.एन. स्नैडन 
रिअॅल एनालिसिस : एस.के.बर्बेरियन
रिअॅल एनालिसिस : आर.जी.बार्टल

सफलता के पांच सूत्र
मैथ्स के कॉन्सेप्ट क्लियर करने के लिए टॉपिक्स पर खुल कर चर्चा कीजिए। बाजार में मौजूद गणित की स्तरहीन किताबें पढ़ने से बचें। ये आपको भटका सकती हैं। लाइब्रेरी में अधिक समय दें और अपने ज्ञान का भंडार बढ़ाएं। जो भी पढ़ें, उसे तार्किक ढंग से समझने की कोशिश करें। जब आप ऐसा क्यों है-का जवाब तलाशने लगेंगे, तो आपका मस्तिष्क दूसरों से कहीं अधिक विकसित होगा। मैथ्स में ज्यादा से ज्यादा अभ्यास की जरूरत होती है।

होना चाहिए पैशन 
मैथ्स में बेहतर करने वाले छात्रों को लेकर हमारे समाज में कई तरह की धारणाएं प्रचलित हैं। कोई उनको जीनियस मानता है, तो कोई जुनूनी, तो कोई सनकी भी कहता है। दरअसल, मेरी राय में जिस स्टूडेंट में अपने सब्जेक्ट में हमेशा डूबे रहने का पैशन नहीं होता, वह कठिन लक्ष्य को कभी भी हासिल नहीं कर सकता। पैशन होना बेहद जरूरी है, कोई कुछ भी कहे, उससे फर्क नहीं पड़ना चाहिए। पढ़ाई के साथ रिचार्ज होने के लिए अपने शौक को भी पूरा करें, तो बेहतर होगा। अक्सर देखा गया है कि मैथ्स के जानकार अच्छे म्यूजिशियन, कवि या सिंगर भी होते हैं। अत: शौक को न दबाएं।
प्रस्तुति: मुनमुन प्रसाद श्रीवास्तव


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